स्त्री प्रत्यय प्रकरणम्
सामान्यत: स्त्रीलिङ्गे विशेषणानि आ-कारन्त भवन्ति। किन्तु कानिचन विशेषणानि स्त्रीलिङ्गे ई-कारन्त भवन्ति।
यथा - सुन्दरी, लौकिकी, आधुनिकी, पुरातनी, मासिकी।
तर्हि प्रश्न: उदेति - किमर्थं सुन्दरी न तु सुन्दरा। कथं ज्ञायते?
सूत्रमस्ति "षिद्गौरादिभ्यश् च"- ४.१.४१
सामान्यत: अकारन्त शब्दाः टाप् इति स्त्री प्रत्ययेन (ट्+आ+प्) आकारान्तं प्राप्नोति ।
अत्र
गौरी …(गौरादिगणः) इति कश्च्न गणः अस्ति। तस्मिन् गणे सुन्दर इति पदमपि
अस्ति । तस्मिन् गणे यानि पदानि सन्ति ते ङीष् प्रत्ययं प्राप्नुवन्ति। (ङ्+ई+ष्)। ते टाप् न प्राप्नुवन्ति।
अतः एव सुन्दरी न तु सुन्दरा।
४.१.३ (स्त्रियाम्) -> ४.१.४०(अन्यतो ङीष्) -> ४.१.४१ (षिद्गौरादिभ्यश् च)
गौरादिभ्यः गौरी। मत्सी। गौर। मत्स्य। मनुष्य। शृङ्ग। हय। गवय। मुकय। ऋष्य। पुट। द्रुण। द्रोण। हरिण। कण। पटर। उकण। आमलक। कुवल। बदर। बम्ब। तर्कार। शर्कार। पुष्कर। शिखण्ड। सुषम। सलन्द। गडुज। आनन्द। सृपाट। सृगेठ। आढक। शष्कुल। सूर्म। सुब। सूर्य। पूष। मूष। घातक। सकलूक। सल्लक। मालक। मालत। साल्वक। वेतस। अतस। पृस। मह। मठ। छेद। श्वन्। तक्षन्। अनडुही। अनड्वाही। एषणः करणे। देह। काकादन। गवादन। तेजन। रजन। लवण। पान। मेध। गौतम। आयस्थूण। भौरि। भौलिकि। भौलिङ्गि। औद्गाहमानि। आलिङ्गि। आपिच्छिक। आरट। टोट। नट। नाट। मलाट। शातन। पातन। सवन। आस्तरन। आधिकरण। एत। अधिकार। आग्रहायणी। प्रत्यवरोहिणी। सेवन। सुमङ्गलात् संज्ञायाम्। सुन्दर। मण्डल। पिण्ड। विटक। कुर्द। गूर्द। पट। पाण्ट। लोफाण्ट। कन्दर। कन्दल। तरुण। तलुन। बृहत्। महत्। सौधर्म। रोहिणी नक्षत्रे। रेवती नक्षत्रे। विकल। निष्फल। पुष्कल। कटाच्छ्रोणिवचने। पिप्पल्यादयश्च। पिप्पली। हरीतकी। कोशातकी। शमी। करीरी। पृथिवी। क्रोष्ट्री। मातामह। पितामह।
गौरादिभ्यः गौरी। मत्सी। गौर। मत्स्य। मनुष्य। शृङ्ग। हय। गवय। मुकय। ऋष्य। पुट। द्रुण। द्रोण। हरिण। कण। पटर। उकण। आमलक। कुवल। बदर। बम्ब। तर्कार। शर्कार। पुष्कर। शिखण्ड। सुषम। सलन्द। गडुज। आनन्द। सृपाट। सृगेठ। आढक। शष्कुल। सूर्म। सुब। सूर्य। पूष। मूष। घातक। सकलूक। सल्लक। मालक। मालत। साल्वक। वेतस। अतस। पृस। मह। मठ। छेद। श्वन्। तक्षन्। अनडुही। अनड्वाही। एषणः करणे। देह। काकादन। गवादन। तेजन। रजन। लवण। पान। मेध। गौतम। आयस्थूण। भौरि। भौलिकि। भौलिङ्गि। औद्गाहमानि। आलिङ्गि। आपिच्छिक। आरट। टोट। नट। नाट। मलाट। शातन। पातन। सवन। आस्तरन। आधिकरण। एत। अधिकार। आग्रहायणी। प्रत्यवरोहिणी। सेवन। सुमङ्गलात् संज्ञायाम्। सुन्दर। मण्डल। पिण्ड। विटक। कुर्द। गूर्द। पट। पाण्ट। लोफाण्ट। कन्दर। कन्दल। तरुण। तलुन। बृहत्। महत्। सौधर्म। रोहिणी नक्षत्रे। रेवती नक्षत्रे। विकल। निष्फल। पुष्कल। कटाच्छ्रोणिवचने। पिप्पल्यादयश्च। पिप्पली। हरीतकी। कोशातकी। शमी। करीरी। पृथिवी। क्रोष्ट्री। मातामह। पितामह।
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